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हर्ड इम्युनिटी


प्रीलिम्स के लिये:

हर्ड इम्युनिटी,  COVID-19



मेन्स के लिये:

COVID-19, संक्रामक रोगों से संबंधित चुनौतियाँ


चर्चा में क्यों?

हाल ही में ब्रिटिश सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार ने ब्रिटेन में तेज़ी से फैल रही COVID-19 की चुनौती से निपटने के लिये हर्ड इम्युनिटी (Herd Immunity) के विकल्प को अपनाने के संकेत दिये हैं। 




मुख्य बिंदु:

क्या है हर्ड इम्युनिटी (Herd Immunity): 

  • हर्ड इम्युनिटी से आशय- “किसी समाज या समूह के कुछ प्रतिशत लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास के माध्यम से किसी संक्रामक रोग के प्रसार को रोकना है।”  

  • इस प्रक्रिया को अपनाने के पीछे अवधारणा यह है कि यदि पर्याप्त लोग प्रतिरक्षित (Immune) हों तो किसी समाज या समूह में रोग के फैलने की शृंखला को तोड़ा जा सकता है और इस प्रकार रोग को उन लोगों तक पहुँचाने से रोका जा सकता है, जिन्हें इससे सबसे अधिक खतरा हो या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है।




हर्ड इम्युनिटी कैसे काम करती है?


  • किसी संक्रामक बीमारी के प्रसार और उसके लिये आवश्यक प्रतिरक्षा सीमा का अनुमान लगाने के लिए महामारी वैज्ञानिक (Epidemiologists) एक मानक का उपयोग करते हैं जिसे ‘मूल प्रजनन क्षमता’ (Basic Reproductive Number-R0) कहा जाता है।

  • यह बताता है कि किसी एक मामले या रोगी के संपर्क में आने पर कितने अन्य लोग उस रोग से संक्रमित हो सकते हैं।

  • 1 से अधिक R0 होने का मतलब है कि एक व्यक्ति कई अन्य व्यक्तियों को संक्रमित कर सकता है।

  • वैज्ञानिक प्रमाण के अनुसार, खसरे (Measles) से पीड़ित एक व्यक्ति 12-18 अन्य व्यक्तियों जबकि इन्फ्लूएंजा (Influenza) से पीड़ित व्यक्ति लगभग 1-4 व्यक्तियों को संक्रमित कर सकता है।

  • वर्तमान में चीन से उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर विशेषज्ञों का मानना है कि COVID-19 का R0 2 से 3 के बीच हो सकता है।

  • कोई भी संक्रमण किसी समाज/समूह में तीन प्रकार से फैल सकता है:

  1. पहली स्थिति में जहाँ समूह में किसी भी व्यक्ति का टीकाकरण न हुआ हो ऐसे समूह में यदि 1 गुणांक वाले R0 के दो मामले आते हैं तो ऐसे में वह पूरा समुदाय संक्रमित हो सकता है।

  2. दूसरी स्थिति में यदि किसी समूह के कुछ ही लोगों का टीकाकरण हुआ हो तो उन लोगों को छोड़कर समूह के अन्य लोग संक्रमित हो सकते हैं।

  3. परंतु यदि किसी समूह में पर्याप्त लोग प्रतिरक्षित हों तो ऐसी स्थिति में समूह के वही लोग संक्रमित होंगे जो बहुत ही कमज़ोर होंगे या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत ना हो।   




हर्ड इम्युनिटी कैसे प्राप्त की जा सकती है?


  • विशेषज्ञों के अनुसार हर्ड इम्युनिटी की सफलता कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे-संक्रमण के बचाव के लिये दिये जाने वाले टीके का प्रभाव, संक्रमण और टीके के प्रभाव की अवधि और समूह का वह भाग जो संक्रमण के प्रसार के लिये उत्तरदाई हो आदि। 

  • गणितीय रूप में इसे एक निश्चित संख्या से निर्धारित किया जाता है, जिसे ‘समूह प्रतिरक्षा सीमा’ (Herd Immunity Threshold) कहा जाता है। यह उन लोगों की संख्या को दर्शाता है जिन पर संक्रमण का प्रभाव और संचार नहीं हो सकता। 

  • पोलियो के लिये यह सीमा 80-85% जबकि खसरे के लिये 95% है। वर्तमान में उपलब्ध आँकड़ों के आधार पर COVID-19 के लिये यह सीमा लगभग 60%है अर्थात किसी समूह में COVID-19 के प्रति हर्ड इम्युनिटी प्राप्त करने हेतु समूह के 60% लोगों का प्रतिरक्षित होना आवश्यक है।



COVID-19 से निपटने में हर्ड इम्युनिटी की चुनौतियाँ: